महाराष्ट्र में प्रोफेशन टैक्स खत्म करने की मांग तेज

व्यापारिक संगठनों ने सरकार पर बढ़ाया दबाव

महाराष्ट्र में व्यवसाय कर (प्रोफेशन टैक्स) को लेकर व्यापारिक संगठनों का दबाव लगातार बढ़ रहा है। फेडरेशन ऑफ एसोसिएशन ऑफ महाराष्ट्र (एफएएम) ने राज्य सरकार को पत्र लिखकर इस कर को तत्काल प्रभाव से समाप्त करने की मांग की है।

संगठन का कहना है कि मौजूदा आर्थिक परिस्थितियों में अतिरिक्त कर का बोझ व्यापारियों और कर्मचारियों दोनों के लिए मुश्किलें बढ़ा रहा है। इससे व्यवसाय की गति धीमी हो रही है और रोजगार सृजन पर भी असर पड़ रहा है।

कर्मचारियों पर सीधा असर

वर्तमान नियमों के अनुसार, राज्य में पुरुष कर्मचारियों के 7,500 रुपये मासिक वेतन पर 175 रुपये व्यवसाय कर काटा जाता है। वहीं महिला कर्मचारियों के लिए 25,000 रुपये तक की वेतन सीमा निर्धारित है, जिसके बाद कर लागू होता है।

व्यापारिक संगठनों का तर्क है कि यह कटौती कर्मचारियों की आय को प्रभावित करती है। उनका कहना है कि महंगाई के दौर में कर्मचारियों को राहत देने की आवश्यकता है, न कि अतिरिक्त कर का बोझ डालने की।

उद्यमियों और भागीदारों पर भी भार

सिर्फ कर्मचारी ही नहीं, बल्कि स्वामित्व और भागीदारी फर्मों के मालिकों तथा प्रत्येक भागीदार को भी अलग से यह कर देना पड़ता है। इससे छोटे और मध्यम उद्योगों पर अतिरिक्त वित्तीय दबाव बनता है।

व्यापारिक संगठनों का मानना है कि रोजगार देने वाले उद्यमियों पर अतिरिक्त कर लगाना आर्थिक गतिविधियों को कमजोर करता है। इससे नए निवेश और विस्तार योजनाओं पर भी असर पड़ सकता है।

बजट में घोषणा की अपील

एफएएम अध्यक्ष जितेंद्र शाह ने मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में आगामी बजट में प्रोफेशन टैक्स समाप्त करने की घोषणा करने की मांग की है। उनका कहना है कि यह कदम व्यापार को नई ऊर्जा देगा और रोजगार के अवसर बढ़ाएगा।

संगठन को उम्मीद है कि सरकार जल्द ही इस मुद्दे पर सकारात्मक निर्णय लेगी। उल्लेखनीय है कि 15 मई 2025 को हुई एक उच्चस्तरीय बैठक में भी इस विषय पर चर्चा हुई थी, लेकिन अब तक अंतिम फैसला नहीं लिया गया है।

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