
तमिलनाडु में थलापति विजय की टीवीके सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है लेकिन बहुमत से 10 सीट पीछे होने के कारण सरकार गठन में चुनौती आ रही है देखना यह है की क्या विजय CM बनते है ?
डिजिटल डेस्क । तमिलनाडु की राजनीति में सिनेमा कलाकार से नेता बने थलापति विजय के नेतृत्व वाली तमिलगा वेत्री कड़गम (टीवीके) सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है इस नै पार्टी ने दशकों पुराने डीएमके और एआईएडीएमके के वर्चस्व को खत्म कर दिया है लेकिन चेन्नई की सत्ता तक पहुंचने की राह में अभी भी रोड़ा है।
ज्ञात हो कि विजय की पार्टी 234 सदस्यीय विधानसभा में बहुमत साबित करने के लिए जरूरी आंकड़ों से पीछे रह गई है, जिसके कारण राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर के सामने सरकार गठन की चुनौती खड़ी हो गई है।
टीवीके बहुमत के आंकड़े से 10 सीट पीछे
आपको बता दे कि हालिया नतीजों में विजय की टीवीके ने डीएमके और एआईएडीएमके दोनों को पछाड़ते हुए 108 सीटों पर जीत दर्ज की है हालांकि तमिलनाडु विधानसभा में बहुमत का जादुई आंकड़ा 118 है जिससे टीवीके अभी 10 सीट दूर है , इस बीच कांग्रेस के 5 विधायकों के समर्थन के साथ विजय के गठबंधन की संख्या 113 तक पहुंचती है लेकिन विजय द्वारा अपनी दो जीती हुई सीटों में से एक छोड़ने के बाद यह आंकड़ा 112 रह जाएगा , बहुमत से 5-6 सीट कम होने के कारण सरकार गठन का मामला अधर में लटका हुआ नजर आ रहा है ।
राजभवन ने रखी बहुमत साबित करने की शर्त

बता दे कि राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर ने गुरुवार को विजय को लोक भवन आमंत्रित किया और स्पष्ट किया कि फिलहाल उनके पास सरकार बनाने के लिए आवश्यक बहुमत का समर्थन स्थापित नहीं हुआ है राज्यपाल ने विजय से उन विधायकों की सूची और विवरण मांगा है जिनके दम पर टीवीके सरकार बनाने का दावा पेश कर रही है तो वही दूसरी ओर चर्चा है कि यदि डीएमके या एआईएडीएमके में से कोई भी सत्ता हथियाने की कोशिश करता है तो विजय अपने सभी 108 विधायकों के सामूहिक इस्तीफे का बड़ा कदम उठा सकते हैं ।
दो कट्टर दुश्मनों के बीच गठबंधन की आहट
राजनितिक नजरिए से देखते हुए लोगो में यह चर्चा है कि टीवीके के बढ़ते प्रभाव ने तमिलनाडु की पारंपरिक राजनीति को पूरी तरह बदल दिया है विजय को मुख्यमंत्री की कुर्सी तक पहुँचने से रोकने के लिए कट्टर प्रतिद्वंद्वी डीएमके और एआईएडीएमके के बीच नजदीकी बढ़ने की खबरें हैं सूत्रों के मुताबिक कार्यवाहक मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन ने पार्टी विधायकों को सूचित किया है कि एआईएडीएमके के महासचिव एडप्पादी के. पलानीस्वामी ने सरकार बनाने और विजय को रोकने के लिए समर्थन की पेशकश की है EPS ने शुक्रवार को राज्यपाल से मिलने का समय भी मांगा है ।
तो वही विजय के सहयोगियों विशेषकर VCK नेता थोल थिरुमावलवन और वामपंथी दलों ने राज्यपाल के रुख की तीखी आलोचना की है थिरुमावलवन ने आरोप लगाया कि राज्यपाल केंद्र की भाजपा सरकार के दबाव में काम कर रहे हैं ताकि विजय के संवैधानिक अधिकार को बाधित किया जा सके उन्होंने मांग की कि सबसे बड़ी पार्टी होने के नाते राज्यपाल को तुरंत विजय को आमंत्रित करना चाहिए और उन्हें विधानसभा के पटल पर बहुमत साबित करने का मौका देना चाहिए ।
सत्ता के इस खेल में अब छोटी पार्टियों की भूमिका निर्णायक हो गई है स्टालिन ने VCK और वामपंथी दलों के साथ बैठक की है जिनके पास कुल 6 विधायक हैं थिरुमावलवन ने पुष्टि की है कि विजय ने भी उनसे सरकार बनाने के लिए संपर्क किया है लेकिन वे किसी भी फैसले पर पहुंचने से पहले पार्टी की प्रक्रियाओं और अन्य राजनीतिक कारणों पर विचार कर रहे हैं अब देखना यह दिलचस्प होगा की तमिलनाडु में क्या सिनेमा कलाकार CM की कुर्सी पर बैठते है या फिर राजनीती कोई और मोड़ लेती है |

