मुंबई | मुलुंड स्थित 256 एकड़ मिठागर भूमि को बचाने की मांग को लेकर ‘एकता – द पावर ऑफ यूथ एंड यूनिटी NGO’ की ओर से नमक सत्याग्रह अभियान के तहत जनजागरण और सम्मेलन का आयोजन किया गया , इस मुहिम का उद्देश्य मिठागर भूमि के संरक्षण के साथ – साथ मुंबई के पर्यावरण और आम नागरिकों के हितों की रक्षा करना है इस अभियान को लेकर एकता NGO के अध्यक्ष राकेश शंकर शेट्टी ने अपने कार्यालय में पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा कि मुलुंड की यह जमीन केवल जमीन का एक टुकड़ा नहीं, बल्कि मुंबई के पर्यावरणीय संतुलन और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य से जुड़ा महत्वपूर्ण मुद्दा है ।
उन्होंने कहा कि विकास के नाम पर ऐसी जमीनों के साथ समझौता नहीं होना चाहिए और सरकार को इस भूमि की स्थिति स्पष्ट करते हुए इसके संरक्षण की दिशा में ठोस कदम उठाने चाहिए , उन्होंने स्पष्ट किया कि यह लड़ाई किसी राजनीतिक दल के खिलाफ नहीं, बल्कि मुंबई की जमीन, पर्यावरण और आम नागरिकों के अधिकारों के लिए है वहीं, आयोजित सम्मेलन में मुंबई उत्तर – मध्य की सांसद वर्षा ताई गायकवाड विशेष रूप से उपस्थित रहीं , उन्होंने मंच से आम नागरिकों, गरीबों और मुंबई के पर्यावरण से जुड़े मुद्दों को लेकर अपनी बात रखी और सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए।वर्षा गायकवाड ने 9 अगस्त के ‘भारत छोड़ो आंदोलन’ का संदर्भ देते हुए कहा कि आज मुंबई की जमीन और नागरिकों के अधिकारों की रक्षा के लिए भी एकजुट होकर आवाज उठाने की जरूरत है ।
उन्होंने ‘मुंबई को बिकने नहीं देंगे’ की भावना के साथ जनहित के मुद्दों पर संघर्ष जारी रखने की बात कही , आंदोलन के तहत 256 एकड़ मिठागर भूमि को जनहित में सुरक्षित रखने, निजी निर्माण पर रोक, स्वतंत्र पर्यावरणीय आकलन तथा भविष्य में इस क्षेत्र का उपयोग गार्डन, खेल मैदान, अस्पताल जैसी जनहितकारी सुविधाओं के लिए किए जाने की मांग रखी गई है , आंदोलन से जुड़े आयोजकों ने नागरिकों से इस मुहिम में शांतिपूर्ण तरीके से जुड़ने की अपील की है मुलुंड की इस 256 एकड़ भूमि को लेकर उठी आवाज अब मुंबई के विकास, पर्यावरण और सार्वजनिक जमीन के भविष्य से जुड़ा महत्वपूर्ण मुद्दा बनती जा रही है अब निगाहें इस बात पर हैं कि सरकार इस मामले में आगे क्या कदम उठाती है ।