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नागरिकों ने किया तीखा सवाल कौन कर रहा संवैधानिक पद के अधिकारों का इस्तेमाल  ? 

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*भिवंडी ( भगवानदास विश्वकर्मा ) ।* भिवंडी शहर में इन दिनों एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है जिसने महानगरपालिका प्रशासन के कामकाज पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं ? वायरल वीडियो में प्रभाग समिति क्रमांक 3 की सभापति रजिता कोंडा की कुर्सी पर उनके पति मोहन कोंडा बैठे हुए दिखाई दे रहे हैं , उनके सामने महानगरपालिका के अधिकारी और कर्मचारी मौजूद हैं तथा संबंधित व्यक्ति अधिकारियों को कामकाज को लेकर निर्देश देते हुए दिखाई दे रहे हैं , वीडियो में प्रभाग समिति क्रमांक 3 के सहायक आयुक्त नितेश चौधरी भी उनके पास बैठे दिखाई दे रहे हैं ।

गौरतलब है कि अब भिवंडी करों के बीच यह सवाल चर्चा का विषय बन गया है कि जिस पद पर निर्वाचित सभापति बैठती हैं उस आधिकारिक कुर्सी पर उनके पति मोहन कोंडा किस अधिकार से बैठकर अधिकारियों को निर्देश दे रहे थे ?महानगरपालिका प्रशासन कानून और निर्धारित नियमों के अनुसार चलता है ऐसे में यदि वायरल वीडियो में दिखाई दे रहा घटनाक्रम वास्तविक है तो यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि संबंधित व्यक्ति को अधिकारियों को निर्देश देने का अधिकार किस नियम आदेश या प्राधिकरण के तहत प्राप्त था ?

सभापती का पद रजिता कोंडा के नाम मगर अधिकार मोहन कोंडा के हाथ में ?’

बता दे कि वीडियो वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर नागरिकों की तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं , नागरिकों का सवाल है कि यदि कोई व्यक्ति निर्वाचित पदाधिकारी नहीं है तो वह महानगरपालिका की आधिकारिक कुर्सी पर बैठकर अधिकारियों को काम करने की पद्धति कैसे बता सकता है ?नागरिकों का आरोप है कि यदि ऐसे मामलों पर प्रशासन मौन रहता है तो इससे निर्वाचित पदों की गरिमा और महानगरपालिका की प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े होना स्वाभाविक है ।

प्रशासन से जांच की मांग और कार्यवाही की मांग….

इस पूरे मामले में महानगरपालिका आयुक्त अनमोल सागर को वायरल वीडियो की स्वतंत्र जांच करानी चाहिए और वीडियो कब और कहां बनाया गया उस समय कौन – कौन से अधिकारी मौजूद थे , संबंधित व्यक्ति को सभापति की कुर्सी पर बैठने की अनुमति किसने दी और क्या उन्हें अधिकारियों को निर्देश देने का कोई आधिकारिक अधिकार प्राप्त था इन सभी सवालों का जवाब जनता के सामने आना चाहिए ।

ज्ञात हो कि वायरल वीडियो की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है इसलिए वीडियो के आधार पर किसी व्यक्ति को दोषी ठहराने के बजाय भिवंडी निजामपूर शहर महानगरपालिका प्रशासन द्वारा निष्पक्ष जांच कर वास्तविक स्थिति स्पष्ट करना जरूरी है ।

भिवंडी करों का सीधा सवाल ……..

“संवैधानिक और वैधानिक पदों की गरिमा कायम रहेगी या फिर पदाधिकारियों के परिजनों का हस्तक्षेप ही महानगरपालिका का नया नियम बनेगा ? ”अब इस वायरल वीडियो पर भिवंडी महानगरपालिका प्रशासन क्या स्पष्टीकरण देता है और क्या कार्रवाई करता है इस पर शहरवासियों की नजरें टिकी हुई हैं ।

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