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ठाणे के विकास को विरोध नहीं, लेकिन क्षमता जांचे बिना उच्च FSI/TDR को मंजूरी न दें : अँड. संजय घाडीगांवकर

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ठाणे ( चंद्रभूषण विश्वकर्मा ) । ठाणे शहर में बढ़ते उच्च – FSI / TDR बड़े पुनर्विकास और आवासीय परियोजनाओं को देखते हुए भविष्य की आबादी तथा बुनियादी सुविधाओं की क्षमता का वैज्ञानिक और कानूनी स्तर पर समन्वय किए बिना बड़े विकास प्रोजेक्ट्स को मंजूरी नहीं दी जानी चाहिए यह मांग अधिवक्ता संजय पांडुरंग घाडीगांवकर ने मुख्यमंत्री, महाराष्ट्र सरकार, ठाणे जिला प्रशासन और ठाणे महानगरपालिका से की है ।

उन्होंने कहा कि उच्च FSI /TDR का अर्थ केवल अधिक निर्माण नहीं है बल्कि इसके साथ आबादी, पानी की मांग, सीवेज, कचरा, यातायात, स्वास्थ्य सुविधाओं, अग्निसुरक्षा और पर्यावरण पर भी अतिरिक्त दबाव बढ़ता है इसलिए बड़े प्रोजेक्ट्स को मंजूरी देने से पहले Population Impact Assessment (PIA), Infrastructure Impact Assessment (IIA), Ecological Carrying Capacity Assessment (ECCA) और Cumulative Impact Assessment (CIA) अनिवार्य किए जाने चाहिए।

Capacity First, Development Later’ नीति लागू करने की मांग

गौरतलब है कि घाडीगांवकर ने मांग की कि प्रत्येक बड़े प्रोजेक्ट के लिए मौजूदा बुनियादी सुविधाओं की क्षमता, प्रस्तावित अतिरिक्त मांग तथा प्रोजेक्ट पूरा होने के बाद संभावित कमी या उपलब्ध क्षमता का पूरा गणित सार्वजनिक किया जाए , विशेष रूप से पानी की आपूर्ति, STP/सीवेज व्यवस्था, ठोस कचरा प्रबंधन, सड़क एवं सार्वजनिक परिवहन, अस्पताल, स्कूल, अग्निशमन व्यवस्था और बारिश के पानी की निकासी की क्षमता की जांच की जाए  ।

बता दे कि उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि पानी या सीवेज व्यवस्था की क्षमता अपर्याप्त है तो केवल FSI / TDR नियमों के तहत निर्माण की अनुमति उपलब्ध होने के आधार पर अतिरिक्त विकास क्षमता को मंजूरी नहीं दी जानी चाहिए ।

2014 से 2026 तक पर्यावरणीय नुकसान का स्वतंत्र ऑडिट हो….

वर्ष 2014 से 2026 के बीच ठाणे के तालाबों, wetlands, प्राकृतिक नालों, recharge areas, वृक्ष आवरण, खुले स्थानों और बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में हुए बदलावों का GIS आधारित स्वतंत्र Environmental Loss vs Restoration Audit किया जाए ।

साथ ही नए Development Plan में प्राकृतिक जल निकासी, तालाबों, wetlands, recharge areas और अन्य पारिस्थितिक संपत्तियों के ‘No Net Loss’ का सिद्धांत शामिल करने की मांग भी की गई है ।

ज्ञात हो कि पानी टैंकर और STP क्षमता का पूरा हिसाब सार्वजनिक हो घाडीगांवकर ने 2014 से 2026 के बीच पानी के टैंकरों पर हुए खर्च, निविदाओं, ठेकेदारों, दरों, ट्रिप और GPS रिकॉर्ड सहित Water Supply & Tanker Financial/Performance Audit सार्वजनिक करने की मांग की है ।

इसके अलावा ठाणे के सभी STP की क्षमता, वास्तविक उपयोग और सीवेज की कमी का विवरण भी सार्वजनिक किया जाए ताकि भविष्य की आबादी को ध्यान में रखते हुए पानी और सीवेज व्यवस्था की Future Capacity Balance रिपोर्ट तैयार की जाए ।

2031, 2041 और 2046 के लिए ‘Thane Urban Carrying Capacity Report’

नए Development Plan को अंतिम रूप देने से पहले स्वतंत्र विशेषज्ञ संस्था के माध्यम से Thane Urban Carrying Capacity Report तैयार करने की मांग की गई है , इस रिपोर्ट में आबादी, FSI/TDR, पानी, सीवेज, कचरा, यातायात, स्वास्थ्य, शिक्षा, अग्निसुरक्षा, बाढ़ का खतरा, हरित क्षेत्र, तालाब, wetlands, प्राकृतिक नाले और climate risk का एकीकृत मूल्यांकन किया जाना चाहिए।

बड़े प्रोजेक्ट्स के लिए ‘Capacity Certificate’ अनिवार्य हो

ताकि प्रत्येक बड़े उच्च-FSI/TDR अथवा पुनर्विकास प्रोजेक्ट के लिए पानी की उपलब्धता, सीवेज क्षमता, यातायात, बारिश के पानी की निकासी एवं बाढ़ जोखिम, ठोस कचरा, स्वास्थ्य एवं आपातकालीन सुविधाओं तथा पर्यावरणीय वहन क्षमता से संबंधित स्वतंत्र प्रमाणपत्र अनिवार्य करने की मांग की गई है  ।

साथ ही महाराष्ट्र सरकार से UDCPR में आवश्यक संशोधन कर अधिक विकास दबाव वाले शहरों के लिए High Density Development Capacity Protocol लागू करने की भी मांग की गई है।

30 दिनों में कारणयुक्त जवाब देने की मांग

घाडीगांवकर ने शासन और संबंधित प्रशासन से 30 दिनों के भीतर ठाणे की वर्तमान एवं भविष्य की आबादी, पानी और STP क्षमता, कचरा प्रबंधन, यातायात, स्वास्थ्य एवं अग्निशमन सुविधाओं, बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों, GIS मैपिंग, 2014-2026 के पर्यावरणीय ऑडिट तथा उच्च-FSI/TDR परियोजनाओं के population और infrastructure impact की जानकारी सार्वजनिक करने की मांग की है इसके साथ ही मौजूदा क्षमता की कमी को दूर करने के लिए आवश्यक निधि और समयबद्ध कार्ययोजना भी सार्वजनिक की जाए ।

उन्होंने कहा कि यदि प्रशासन की ओर से संतोषजनक और कारणयुक्त जवाब नहीं दिया गया तथा आवश्यक कार्रवाई नहीं हुई, तो उपलब्ध दस्तावेजों और तथ्यों के आधार पर मुंबई उच्च न्यायालय में उचित संवैधानिक, रिट अथवा PIL कार्रवाई करने का अधिकार सुरक्षित रखा गया है  ।

अँड. संजय घाडीगांवकर ने कहा, “ठाणे के विकास को रोकना हमारा उद्देश्य नहीं है। लेकिन FSI/TDR से पहले क्षमता, निर्माण से पहले पानी और सीवेज व्यवस्था, आबादी से पहले सार्वजनिक सुविधाएं तथा विकास से पहले पर्यावरणीय वहन क्षमता सुनिश्चित होनी चाहिए। ठाणे का विकास ठाणेकरों के भविष्य का आधार होना चाहिए, उनके भविष्य पर बोझ नहीं।” अब देखना यह दिलचस्प होगा कि घाड़ीगांवकर की माग तो कितनी गंभीरता से लिया जाता है ।

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