12 एफ एस आई देकर ठाणे की जमीन बेचने का आरोप : अगले सप्ताह क्लस्टर कार्यालय पर मोर्चा निकालने की घोषणा
ठाणे ( चंद्रभूषण विश्वकर्मा ) । ठाणे महानगरपालिका की महासभा के कामकाज का सीधा प्रसारण नहीं किए जाने को लेकर राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) ने सत्ताधारी पक्ष और प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं , पार्टी के जिलाध्यक्ष मनोज प्रधान ने आरोप लगाया कि महासभा में संपत्ति कर बढ़ोतरी के मुद्दे को गर्माकर उसके पीछे क्लस्टर डेवलपमेंट के लिए कंपनी स्थापित करने का प्रस्ताव मंजूर कराया गया , उन्होंने सवाल उठाया कि मुंबई महानगरपालिका और विधानमंडल के कामकाज का लाइव प्रसारण किया जाता है तो ठाणे मनपा की महासभा का सीधा प्रसारण क्यों नहीं किया जाता ?
क्लस्टर डेवलपमेंट के लिए विशेष प्रयोजन वाहन (SPV) कंपनी स्थापित करने के मनपा के फैसले के खिलाफ राष्ट्रवादी कांग्रेस (शरदचंद्र पवार) ने आक्रामक रुख अपनाया है , इस मुद्दे को लेकर आयोजित पत्रकार परिषद में मनोज प्रधान ने कहा कि क्लस्टर परियोजना का विरोध नहीं है, लेकिन इसके लिए कितनी एफ एस आई दी जाएगी और शहर के बुनियादी ढांचे पर इसका क्या असर पड़ेगा , इसकी स्पष्ट जानकारी नागरिकों के सामने रखी जानी चाहिए ।
गौरतलब है कि प्रधान ने दावा किया कि क्लस्टर परियोजना के तहत करीब 12 एफ एस आई दिए जाने की जानकारी सामने आ रही है , उन्होंने कहा कि ठाणे में जमीन की कीमत बेहद अधिक है और यदि 12 एफ एस आई के आधार पर बड़े पैमाने पर निर्माण किया गया तो शहर की आबादी में भारी वृद्धि होगी उन्होंने ठाणे मनपा आयुक्त से इस पूरे मामले पर श्वेतपत्र जारी करने की मांग की ।
‘ *आज की आबादी को पानी नहीं, तो पांच गुना आबादी का क्या होगा ?’*
मनोज प्रधान ने कहा कि करीब 1,500 हेक्टेयर यानी 3,000 एकड़ से अधिक क्षेत्र में क्लस्टर डेवलपमेंट की योजना है उन्होंने बताया कि कुछ महीने पहले मनपा आयुक्त ने स्वयं ठाणे शहर में करीब 31 एमएलडी पानी की कमी होने की बात कही थी ऐसे में यदि क्लस्टर के 42 क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर निर्माण होता है और आबादी कई गुना बढ़ती है तो पानी , सीवेज , सड़क और अन्य बुनियादी सुविधाओं का क्या होगा ?
उन्होंने आगे बात करते हुए कहा कि आज जो नागरिक ठाणे में रह रहे हैं उन्हें ही पर्याप्त पानी और बेहतर सीवेज व्यवस्था उपलब्ध नहीं हो पा रही है ऐसे में नई आबादी के आने से शहर की मूलभूत सुविधाओं पर भारी दबाव पड़ सकता है ।
‘ *अगर मनपा में विशेषज्ञ अधिकारी नहीं हैं तो काम रोकें’*
क्लस्टर डेवलपमेंट के लिए अलग कंपनी बनाने पर भी प्रधान ने सवाल उठाया उन्होंने कहा कि यदि क्लस्टर परियोजना की नीति और क्रियान्वयन के लिए अलग कंपनी की आवश्यकता पड़ रही है, तो इसका अर्थ है कि मनपा में इस काम के लिए पर्याप्त विशेषज्ञ अधिकारी नहीं हैं या फिर सत्ताधारी वर्ग को अपने अधिकारियों की क्षमता पर भरोसा नहीं है ।
उन्होंने यह भी कहा कि यदि मनपा के अधिकारी क्लस्टर का काम संभालने में सक्षम नहीं है तो वर्तमान में शुरू किए गए काम को तत्काल रोक दिया जाना चाहिए और प्रशासन को स्पष्ट करना चाहिए कि मनपा में विशेषज्ञ अधिकारियों की कमी है ।
‘ *भारतीय बनावटी ईस्ट इंडिया कंपनी’ का आरोप*
मनोज प्रधान ने क्लस्टर कंपनी को लेकर तीखी टिप्पणी करते हुए इसे ‘ *भारतीय बनावटी ईस्ट इंडिया कंपनी’ बताया।* उन्होंने कहा कि राष्ट्रवादी कांग्रेस (शरदचंद्र पवार) इस कंपनी के गठन का विरोध करती है ।
उन्होंने घोषणा की कि पार्टी की ओर से अगले सप्ताह डॉ. जितेंद्र आव्हाड के मार्गदर्शन में क्लस्टर कार्यालय पर मोर्चा निकाला जाएगा , इस पत्रकार परिषद में गट नेता अभिजीत पवार , महिला जिलाध्यक्ष एवं नगरसेविका मनिषा भगत, युवा कार्याध्यक्ष राजेश कदम सहित अन्य पदाधिकारी उपस्थित थे ।
*मनपा की आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए राष्ट्रवादी ने दिए सुझाव*
ठाणे मनपा की आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए राष्ट्रवादी कांग्रेस (शरदचंद्र पवार) के 12 नगरसेवकों ने कई सुझाव भी दिए हैं पार्टी के नेताओं के अनुसार , विभिन्न विभागों की करीब 1,200 से 1,500 करोड़ रुपये की बकाया राशि वसूल की जानी चाहिए ।
इसके अलावा मनपा की कई संपत्तियां नाममात्र दर पर संस्थाओं को दिए जाने का आरोप लगाते हुए उनसे उचित वाणिज्यिक कर या किराया वसूलने की मांग की गई है , अनधिकृत निर्माणों पर कर नहीं लगाया गया है तो वहां कर लगाया जाए और आईटी पार्कों पर आवासीय दर के बजाय वाणिज्यिक दर से कर लगाया जाए ऐसी मांग भी पार्टी ने की है ।
राष्ट्रवादी नेताओं का कहना है कि इन उपायों के जरिए मनपा के राजस्व में पर्याप्त वृद्धि हो सकती है और इसके बाद ही संपत्ति कर बढ़ाने की आवश्यकता पर विचार किया जाना चाहिए , पार्टी ने स्पष्ट किया कि पहले राजस्व बढ़ाने के सुझाए गए उपाय लागू किए जाएं और उसके बाद ही कर वृद्धि पर निर्णय लिया जाए , अब देखना यह दिलचस्प होगा कि ठाणे मनपा आयुक्त इस विषय पर अपनी क्या भूमिका जनता के सामने लाते है ?