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महाराष्ट्र में धर्मांतरण कानून को लेकर बढ़ा विरोध, तुषार गांधी समेत सामाजिक संगठनों ने उठाए सवाल

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मुंबई ।  महाराष्ट्र में प्रस्तावित धर्मांतरण विरोधी कानून को लेकर विवाद बढ़ता दिखाई दे रहा है राज्य सरकार द्वारा Maharashtra Freedom of Religion Act, 2026 को 28 अगस्त 2026 से लागू किए जाने की तैयारी के बीच कई सामाजिक संगठनों ने इसके प्रावधानों पर आपत्ति जताई है , इसी मुद्दे को लेकर सोमवार को मुंबई मराठी पत्रकार संघ में जॉइंट सिविल सोसाइटी की ओर से प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की गई ।

इसमें महात्मा गांधी के पड़पोते तुषार गांधी , सेवानिवृत्त न्यायाधीश अभय थिप्से , फादर फ्रेजर मस्करेनहास , संध्या गोखले , एडवोकेट लारा जेसानी और एडवोकेट इरफान इंजीनियर सहित कई सामाजिक कार्यकर्ताओं और कानून विशेषज्ञों ने अपनी बात रखी ।

कानून के प्रावधानों पर संगठनों की आपत्ति

प्रेस कॉन्फ्रेंस में शामिल संगठनों का कहना है कि नए कानून में धर्म परिवर्तन से पहले नोटिस , घोषणा और सरकारी स्तर पर रिपोर्टिंग जैसी प्रक्रियाओं का प्रावधान है , संगठनों के मुताबिक इससे व्यक्ति की निजी पसंद और विशेष रूप से अंतरधार्मिक विवाह करने वाले लोगों की निजता प्रभावित हो सकती है ।

संगठनों ने कानून में ‘Allurement’ यानी लालच या प्रलोभन की परिभाषा को लेकर भी चिंता जताई है , उनका दावा है कि सामाजिक सेवा , शिक्षा में सहायता या बेहतर अवसर उपलब्ध कराने जैसी गतिविधियां भी जांच के दायरे में आ सकती हैं ।

सुप्रीम कोर्ट में लंबित मामलों का भी दिया हवाला

सिविल सोसाइटी संगठनों ने प्रेस नोट में कहा है कि देश के अन्य राज्यों में लागू ऐसे कानूनों को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिकाएं लंबित हैं , उनका कहना है कि इन मामलों पर अंतिम स्थिति स्पष्ट होने तक महाराष्ट्र में भी कानून के क्रियान्वयन पर पुनर्विचार किया जाना चाहिए , संगठनों ने यह भी दावा किया कि कानून के प्रभावी होने से पहले ही पुणे में इसके तहत दो एफआईआर दर्ज की जा चुकी हैं ,  इसके अलावा मुंबई क्षेत्र में धार्मिक स्थलों और प्रार्थना सभाओं से जुड़ी कथित घटनाओं का भी प्रेस कॉन्फ्रेंस में उल्लेख किया गया , करीब 20 सामाजिक और नागरिक संगठनों ने मांग की है कि सुप्रीम कोर्ट में संबंधित मामलों की सुनवाई पूरी होने तक कानून के क्रियान्वयन पर रोक लगाई जाए और सरकार इस कानून पर पुनर्विचार करे , संगठनों का तर्क है कि जबरन धर्मांतरण जैसी गतिविधियों से निपटने के लिए पहले से मौजूद कानूनी प्रावधान पर्याप्त हैं ।

इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में PUCL, Mumbai For Peace, Association for Protection of Civil Rights (APCR), Maharashtra Stree Mukti Parishad, Centre for Study of Society and Secularism, Forum Against Oppression of Women और The Bombay Catholic Sabha सहित कई संगठनों के प्रतिनिधि शामिल रहे हालांकि कानून के समर्थन में सरकार का पक्ष और इसके प्रावधानों का आधिकारिक उद्देश्य अलग से सामने आना इस पूरे विवाद को समझने के लिए महत्वपूर्ण होगा फिलहाल महाराष्ट्र में धर्मांतरण कानून को लेकर सामाजिक संगठनों और सरकार के बीच बहस तेज होती नजर आ रही है ।

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