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Gen Z Rising में गूंजे युवाओं के सवाल शबाना आज़मी ने भी साझा किए अनुभव

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Gen Z Rising में गूंजे युवाओं के सवाल, शबाना आज़मी ने भी साझा किए अनुभव जंतर-मंतर से उठी बदलाव और लोकतंत्र की आवाज़

मुंबई | Y.B. चव्हाण सेंटर नरीमन पॉइंट Gen Z Rising के कार्यक्रम में बड़ी संख्या में युवा सामाजिक कार्यकर्ता और अन्य प्रतिभागी शामिल हुए , कार्यक्रम के दौरान युवाओं ने अपने अनुभव विचार और आंदोलन से जुड़े मुद्दों को मंच के सामने रखा , कई युवाओं ने जंतर – मंतर पर हुए विरोध – प्रदर्शन के दौरान अपने अनुभव साझा करते हुए अपनी बात रखी , कार्यक्रम में बॉलीवुड की मशहूर अभिनेत्री शबाना आज़मी भी मौजूद रहीं ।

उन्होंने युवाओं की बातों को सुनने के साथ – साथ अपने अनुभव साझा किए और आज़ादी , लोकतंत्र , युवाओं की जिम्मेदारी और शांतिपूर्ण विरोध के महत्व पर अपने विचार रखे , शबाना आज़मी ने अपने पिता और मशहूर शायर कैफ़ी आज़मी की नज़्म “नौजवान” भी पेश की , उन्होंने कहा कि आज़ादी को हमने लंबे समय तक सहज मान लिया जबकि हमारे पूर्वजों ने इसके लिए बहुत संघर्ष और बलिदान दिया था उन्होंने विरोध – प्रदर्शन के दौरान का अपना अनुभव बताते हुए एक करीब 15 वर्षीय बच्चे का जिक्र किया , उनके मुताबिक जब उन्होंने बच्चे से पूछा कि वह प्रदर्शन में क्यों आया है तो उसने कहा— “एक लाठी खाने के बाद आदत हो जाती है।” शबाना आज़मी ने बताया कि उस बच्चे ने अपनी मौजूदगी को लेकर भी भावुक जवाब दिया ।

कार्यक्रम में मौजूद अन्य युवाओं ने भी अपने – अपने अनुभव और विचार साझा किए , किसी ने विरोध – प्रदर्शन के दौरान सामने आई चुनौतियों की बात रखी तो किसी ने लोकतांत्रिक तरीके से अपनी आवाज़ उठाने और अपने अधिकारों के लिए खड़े होने की जरूरत पर जोर दिया , हॉल में बड़ी संख्या में लोगों की मौजूदगी के बीच युवाओं की आवाज़ और शबाना आज़मी के अनुभवों ने कार्यक्रम को खास बना दिया ,  कार्यक्रम का मुख्य संदेश युवाओं की भागीदारी , अपनी बात रखने की आज़ादी और लोकतांत्रिक मूल्यों को लेकर रहा , हिंसा के मुद्दे पर शबाना आज़मी ने अपने संबोधन में आरोप लगाया कि विरोध – प्रदर्शन को शांतिपूर्ण रखने की अपील के बावजूद बाद में हिंसा हुई और उनके मुताबिक यह हिंसा “करवाई गई” थी , यह उनका कार्यक्रम के दौरान व्यक्त किया गया दावा है ।

कुल मिलाकर Gen Z Rising का यह कार्यक्रम युवाओं की आवाज़ उनके अनुभवों और वरिष्ठ अभिनेत्री शबाना आज़मी के विचारों का साझा मंच बना जहां अलग – अलग लोगों ने अपनी बात खुलकर सामने रखी ।

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