ठाणे में बोलीं सुप्रिया सुले : जनता को थोपे गए महंगे प्रोजेक्ट नहीं , बेहतर बस सेवा और बुनियादी सुविधाएं चाहिए
ठाणे ( चंद्रभूषण विश्वकर्मा ) । ठाणे में प्रस्तावित अमेज़न डेटा सेंटर और रिंग मेट्रो प्रोजेक्ट को लेकर राजनीतिक विरोध तेज हो गए है राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) की कार्यकारी अध्यक्ष सुप्रिया सुले ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि स्थानीय जनता इन परियोजनाओं का विरोध कर रही है तो उनकी पार्टी भी जनता के साथ खड़ी होगी और जरूरत पड़ने पर इन प्रोजेक्ट्स के खिलाफ सड़कों पर उतरेगी ।
गौरतलब है कि ठाणे स्थित पार्टी ऑफिस पर पत्रकारों से बातचीत की इस दौरान डॉ. जितेंद्र आव्हाड, जिला अध्यक्ष मनोज प्रधान और कार्यकारी अध्यक्ष प्रकाश पाटिल सहित पार्टी के अन्य पदाधिकारी मौजूद थे ।
‘ *ठाणे को डेटा सेंटर नहीं चाहिए’*
ठाणे में प्रस्तावित अमेज़न डेटा सेंटर को लेकर स्थानीय नागरिकों के विरोध पर प्रतिक्रिया देते हुए सुप्रिया सुले ने कहा कि ठाणे के कुछ नागरिक इस मुद्दे को लेकर उनसे मिले थे उन्होंने दावा किया कि उन्होंने तत्काल स्थानीय सांसद नरेश म्हस्के से भी इस विषय को लेकर संपर्क किया था ।
सुले के मुताबिक स्थानीय लोगों की इच्छा के विपरीत डेटा सेंटर नहीं बनाया जाना चाहिए उन्होंने कहा कि पार्टी ने डॉ. जितेंद्र आव्हाड के नेतृत्व में इस योजना का विरोध करने का फैसला किया है उन्होंने यह भी कहा कि यदि ठाणे की जनता किसी परियोजना की मांग नहीं कर रही है तो सरकार को पहले जनता की राय सुननी चाहिए ।
*रिंग मेट्रो पर भी सवाल*
सुप्रिया सुले ने ठाणे की परिवहन व्यवस्था को लेकर भी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि शहर के नागरिकों की प्राथमिकता बेहतर और मजबूत बस कनेक्टिविटी है लेकिन इसके बजाय हजारों करोड़ रुपये की रिंग मेट्रो परियोजना लाई जा रही है उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि जिस काम को कम खर्च में बेहतर तरीके से किया जा सकता है उस पर अत्यधिक राशि खर्च करने की क्या जरूरत है ?
सुले ने सरकार की कार्यप्रणाली पर कटाक्ष करते हुए कहा कि सरकार को जितना महंगा प्रोजेक्ट होता है उतना ही अधिक पसंद आता है ।
*’बुनियादी सुविधाओं के लिए पैसा नहीं, बड़े प्रोजेक्ट्स के लिए हजारों करोड़’*
बता दे कि सड़कों की खराब स्थिति और गड्ढों को लेकर भी सुप्रिया सुले ने सरकार को घेरते हुए महाराष्ट्र की सड़कों की स्थिति पर तंज कसा और कहा कि राज्य में यात्रा करते समय यह समझना मुश्किल हो जाता है कि ‘यह गड्ढों वाली सड़क है या सड़क वाले गड्ढे ।’
सुले सरकार पर निशाना साधते हुए बोली कि सरकार बड़े – बड़े प्रोजेक्ट्स पर हजारों करोड़ रुपये खर्च करने को तैयार है लेकिन शिक्षा , स्वास्थ्य , सड़क और अन्य बुनियादी सुविधाओं के लिए पर्याप्त धन उपलब्ध नहीं होने की बात कही जाती है ।
सुले ने कोल्हापुर में सड़क परियोजना का उदाहरण देते हुए दावा किया कि जिन परियोजनाओं का स्थानीय किसान विरोध कर रहे हैं उन्हें भी सरकार आगे बढ़ा रही है ।
*अमित ठाकरे मामले को लेकर दोहरे मापदंड का आरोप*
अमित ठाकरे के खिलाफ दर्ज मामले पर पूछे गए सवाल के जवाब में सुप्रिया सुले ने सरकार पर दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगाया और उन्होंने अपने भाई और पूर्व उपमुख्यमंत्री की विमान दुर्घटना में हुई मौत का संदर्भ देते हुए सवाल किया कि उस मामले में एफआईआर या जांच क्यों नहीं हुई सुले ने कहा कि उनके परिवार ने अपना एकमात्र कमाने वाला पुरुष सदस्य खोया है ।
उन्होंने सवाल उठाया कि सत्ता में शामिल नेताओं और मंत्रियों ने इस मामले में एफआईआर या जांच की मांग क्यों नहीं उठाई ?
*GDP पर बोलीं : ‘विकास गरीबों की कीमत पर नहीं होना चाहिए’*
देश की GDP ग्रोथ को लेकर सरकार द्वारा किए जा रहे दावों पर भी सुप्रिया सुले ने प्रतिक्रिया दी उन्होंने कहा कि आर्थिक विकास का जश्न मनाया जाना चाहिए लेकिन यह विकास गरीबों की कीमत पर नहीं होना चाहिए ।
उन्होंने महंगाई का मुद्दा उठाते हुए सवाल किया कि आम आदमी के लिए आज वास्तव में क्या सस्ता है चीनी , चावल, गेहूं या अंडे ?
सुले के अनुसार आम नागरिक रोजमर्रा के खर्च पूरे करने के लिए संघर्ष कर रहा है और सरकार को बड़े प्रोजेक्ट्स के साथ – साथ आम जनता की बुनियादी जरूरतों पर भी ध्यान देना चाहिए ।
*ठाणे में परियोजनाओं को लेकर सियासी टकराव के संकेत*
सुप्रिया सुले के बयान के बाद ठाणे में अमेज़न डेटा सेंटर और रिंग मेट्रो परियोजनाओं को लेकर राजनीतिक माहौल गरमाने के संकेत मिल रहे हैं अब देखना होगा कि सरकार इन परियोजनाओं को लेकर स्थानीय नागरिकों की आपत्तियों पर क्या रुख अपनाती है और विपक्षी दल इस विरोध को किस स्तर तक ले जाते हैं।