मुंबई । अंधेरी पश्चिम के के/पश्चिम वॉर्ड कार्यालय में भ्रष्टाचार के खिलाफ लाचलुचपत प्रतिबंधक विभाग (एसीबी) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए मुंबई महानगरपालिका के दो लोकसेवकों को हिरासत में लिया है एसीबी के अनुसार बेकरी व्यवसाय पर कार्रवाई नहीं करने और व्यवसाय जारी रखने देने के बदले शिकायतकर्ता से रिश्वत की मांग की गई थी ।
एसीबी के मुताबिक आरोपी विजय रमेश पाटील (46), कामगार, के/पश्चिम वॉर्ड ने शिकायतकर्ता से कथित तौर पर खुद के लिए और द्वितीय अभियंता नीरव कुमार चुणीलाल जैसूर (43) के लिए कुल 70 हजार रुपये की रिश्वत मांगी थी रिश्वत देने की इच्छा नहीं होने पर शिकायतकर्ता ने 2 सितंबर 2026 को एसीबी मुंबई में शिकायत दर्ज कराई ।
गौरतलब है कि शिकायत की पुष्टि के दौरान विजय पाटील द्वारा 70 हजार रुपये की मांग किए जाने और शिकायतकर्ता को अपने वरिष्ठ अधिकारी निरवकुमार जैसूर से मिलवाने की बात सामने आई एसीबी की माने तो बातचीत के बाद रिश्वत की रकम 60 हजार रुपये तय हुई और इसके बाद 2 सितंबर को एसीबी ने जाल बिछा कर के/पश्चिम वॉर्ड कार्यालय के भूतल पर लिफ्ट के पास 60 हजार रुपये की रिश्वत लेते विजय पाटील को रंगेहाथ पकड़ा गया जबकि निरवकुमार जैसूर को उनके छठी मंजिल स्थित कार्यालय से हिरासत में लिया गया ।
ज्ञात हो कि एसीबी की कार्रवाई के दौरान जैसूर के पास से दो मोबाइल फोन जब्त किए गए वहीं विजय पाटील की तलाशी में एक मोबाइल फोन, 40,820 रुपये नकद तथा उनके बैग से 2,37,600 रुपये नकद बरामद होने की जानकारी एसीबी ने दी है। मामले में भ्रष्टाचार निवारण कानून के तहत अपराध दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू थी ।
के/पश्चिम वॉर्ड की कार्यप्रणाली पर भी उठे सवाल
बता दे कि इस कार्रवाई के बाद के/पश्चिम वॉर्ड के इमारत एवं कारखाना विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं शिकायतकर्ता की ओर से लगाए गए आरोपों के अनुसार विभाग में बार – बार नोटिस जारी कर कथित तौर पर लोगों पर दबाव बनाया जाता है और बाद में सेटलमेंट के नाम पर वसूली किए जाने की शिकायतें सामने आती रही हैं हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और इनकी निष्पक्ष जांच आवश्यक है ।
शिकायतकर्ता का आरोप है कि सहायक आयुक्त चक्रपाणी इल्ले के कार्यकाल में वॉर्ड में कथित भ्रष्टाचार और वसूली का बोलबाला बढ़ा है और इस इमारत एवं कारखाना विभाग में कथित तौर पर ऐसे अधिकारियों की नियुक्ति की गई है जिन पर वसूली के आरोप लगते रहे हैं हालांकि सहायक आयुक्त या संबंधित अधिकारियों के खिलाफ लगाए गए इन अतिरिक्त आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है ।
ऐसे में एसीबी द्वारा पकड़े गए मामले के साथ – साथ वॉर्ड में नोटिस जारी करने, निरीक्षण, कार्रवाई और कथित सेटलमेंट की पूरी प्रक्रिया की उच्चस्तरीय एवं निष्पक्ष जांच की मांग उठ रही है ।
अब सवाल यह है कि अगर एक मामले में 60 हजार रुपये की रिश्वत लेते कर्मचारी रंगेहाथ पकड़ा गया है तो क्या के/पश्चिम वॉर्ड के इमारत एवं कारखाना विभाग की पूरी कार्यप्रणाली की भी जांच होगी ? क्या वरिष्ठ अधिकारियों की भूमिका और उनके अधीन काम करने वाले कर्मचारियों की नियुक्तियों की भी जांच की जाएगी ?
भ्रष्टाचार के आरोपों की सच्चाई सामने लाने के लिए संबंधित विभाग द्वारा निष्पक्ष जांच और आवश्यक कार्रवाई अब अहम मानी जा रही है लेकिन देखना यह दिलचस्प होगा कि आखिर इस भ्रष्टाचार की पोल एसीबी अपनी जांच में किस तरह खोलती है ?