फर्जी ‘लोक भवन’ लेटरहेड, मुहर और सील के इस्तेमाल का आरोप; करीब 400 VIP कोटे के ई-टिकट की जांच
मुंबई | रेलवे के VIP कोटे से टिकट बुक कराने के लिए कथित तौर पर फर्जी ‘लोक भवन’ लेटरहेड, मुहर और सील का इस्तेमाल करने के मामले में मुंबई सेशंस कोर्ट ने दो भाइयों की जमानत याचिका खारिज कर दी है , मालाबार हिल पुलिस ने इस मामले में सागर ठक्कर (32) और अमरीश ठक्कर (41) को गिरफ्तार किया था । दोनों पर आरोप है कि उन्होंने रेलवे टिकट बुकिंग के लिए इस्तेमाल किए गए कई दस्तावेजों को कथित तौर पर फर्जी तरीके से तैयार किया हालांकि दोनों की ओर से अधिवक्ता अंजलि पाटिल ने अदालत में दलील दी कि उनके मुवक्किलों को झूठे मामले में फंसाया गया है , बचाव पक्ष ने कहा कि पुलिस कथित फर्जी लेटरहेड पहले ही बरामद कर चुकी है और दोनों आरोपियों के हस्ताक्षर के नमूने भी लिए जा चुके हैं ऐसे में उनकी हिरासत में पूछताछ की कोई आवश्यकता नहीं है ।
अमरीश को बताया गया मुख्य आरोपी
गौरतलब है कि अभियोजन पक्ष ने जमानत याचिका का विरोध करते हुए अमरीश ठक्कर को मामले का मुख्य आरोपी बताया अभियोजन के अनुसार अमरीश ने अपने संपर्कों के जरिए राज्यपाल के निजी सहायक के लेटरहेड की तस्वीर हासिल की थी , आरोप है कि इसके बाद अमरीश ने अन्य आरोपियों की मदद से राज्यपाल के निजी सहायक के नाम का फर्जी लेटर हेड और मुहर तैयार करवाई उसने कथित तौर पर अपनी लिखावट में PNR से जुड़ी जानकारी लिखी जो उसे एक अन्य आरोपी से मिली थी इसके बाद उस दस्तावेज पर मुहर लगाकर रेलवे कार्यालय के ड्रॉप – बॉक्स में डाल दिया गया ।
जांच के दौरान पुलिस ने अमरीश के पास से 10 कथित फर्जी लेटरहेड बरामद किए हैं इसके अलावा कंप्यूटर की हार्ड डिस्क भी जब्त की गई है पुलिस के अनुसार अमरीश की निशानदेही पर सागर द्वारा तैयार किए गए कथित फर्जी रबर स्टैम्प और सर्कल रबर स्टाम्प सहित अन्य सामग्री भी बरामद की गई ।
करीब 400 VIP टिकटों की जांच
ज्ञात हो कि अदालत में जांच अधिकारी की ओर से बताया गया कि अब तक आरोपियों और अन्य संदिग्धों द्वारा लोक भवन कार्यालय सहित 23 अन्य सरकारी कार्यालयों के VIP कोटे से करीब 400 ई-टिकट कन्फर्म कराए जाने की जानकारी सामने आई है इस पूरे नेटवर्क की जांच अभी जारी है , मामले की गंभीरता को देखते हुए अदालत ने कहा कि जांच के इस चरण में सबूतों से छेड़छाड़, गवाहों को प्रभावित करने या आरोपियों के फरार होने की संभावना से पूरी तरह इनकार नहीं किया जा सकता ।
अदालत ने जमानत देने से किया इनकार
बता दे कि अदालत ने दोनों भाइयों की जमानत याचिकाएं खारिज करते हुए कहा कि जांच एजेंसी को निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच करने का पर्याप्त अवसर दिया जाना चाहिए अदालत ने यह भी टिप्पणी की कि राज्यपाल के अधिकारी की मुहर , स्टाम्प और लेटरहेड की कथित जालसाजी एक गंभीर अपराध है और मामले की जांच अभी जारी है , फिलहाल दोनों भाइयों को जमानत नहीं मिल सकी है और पुलिस मामले में कथित फर्जी VIP टिकट बुकिंग के पूरे नेटवर्क की जांच कर रही है अब देखना यह दिलचस्प होगा की पुलिस की जांच में और क्या खुलासे होते है ।