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ठाणे में भूमि एकर्स पर ‘मेगा-स्कैम’ के गंभीर आरोप : NCP नेता मनोज प्रधान 

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सरकार को गुमराह कर MHADA के 20% आवासीय कोटे की जमीन हड़पने का दावा NCP नेता मनोज प्रधान ने कार्रवाई की मांग की

ठाणे ( चंद्रभूषण विश्वकर्मा ) । ठाणे के कावेसर इलाके में भूमि एकर्स द्वारा विकसित किए जा रहे ‘लेक स्केप’ प्रोजेक्ट को लेकर राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार गुट) ने गंभीर आरोप लगाए हैं पार्टी के जिला अध्यक्ष मनोज प्रधान ने आरोप लगाया है कि प्रशासन को गुमराह कर प्रोजेक्ट के लिए आवश्यक NOC हासिल की गई और निर्माण पूरा हुए बिना ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट (OC) प्राप्त किया गया साथ ही कम आय वर्ग (LIG) के लिए निर्धारित 20 प्रतिशत आवासीय कोटे का पालन नहीं किए जाने का भी आरोप लगाया गया है ।

गौरतलब है कि मनोज प्रधान ने इसे ठाणे शहर का एक बड़ा मामला बताते हुए भूमि एकर्स के निदेशकों और कथित तौर पर इसमें शामिल अधिकारियों के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज कर पूरी जांच कराने की मांग की है , 6,400 वर्ग मीटर से बढ़कर 8,114 वर्ग मीटर का प्रोजेक्ट कैसे ?

प्रधान के मुताबिक मौजे कावेसर , तालुका एवं जिला ठाणे में भूमि एकर्स द्वारा ‘लेक स्केप’ नाम से प्रोजेक्ट विकसित किया जा रहा है उनका दावा है कि मूल प्लॉट सर्वे नंबर 225 सड़क अलाइनमेंट के कारण विभाजित होकर सर्वे नंबर 225/3 बना हालांकि आरोप है कि बाद में सर्वे नंबर 225/3 को 124/1 और 124/4 के साथ मिलाकर संयुक्त प्लॉट पर निर्माण की मंजूरी हासिल की गई प्रधान के अनुसार शुरुआत में प्रोजेक्ट करीब 6,400 वर्ग मीटर क्षेत्रफल के प्लॉट पर प्रस्तावित था लेकिन बाद में बगल की जमीन को शामिल कर प्रोजेक्ट का क्षेत्रफल लगभग 8,114 वर्ग मीटर हो गया ।

बता दे कि प्रधान का आरोप है कि जिन प्लॉटों के लिए निर्माण की मंजूरी ली गई वहां वास्तविक निर्माण नहीं किया गया और इसके बावजूद पूरे संयुक्त क्षेत्र को प्रोजेक्ट में शामिल कर लिया गया ।

MHADA के 20% आवासीय कोटे पर सवाल

मनोज प्रधान ने 8 नवंबर 2013 के सरकारी आदेश का हवाला देते हुए दावा किया कि 4,000 वर्ग मीटर से अधिक क्षेत्रफल वाले संबंधित रिहायशी प्रोजेक्ट में निर्धारित नियमों के तहत 20 प्रतिशत आवासीय इकाइयां MHADA के लिए उपलब्ध कराना जरूरी था ,उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि 2023 में स्वीकृत करीब 8,114 वर्ग मीटर के प्रोजेक्ट में इस प्रावधान का पालन नहीं किया गया और आर्थिक रूप से कमजोर एवं कम आय वर्ग के लिए निर्धारित आवासीय हिस्से को MHADA को नहीं सौंपा गया ।

प्रधान ने आरोप लगाया कि इस पूरे मामले में संबंधित आर्किटेक्ट के साथ – साथ ठाणे महानगरपालिका के नगर विकास विभाग तथा जिला कलेक्टर कार्यालय के कुछ अधिकारियों की भूमिका की भी जांच होनी चाहिए ताकि इस भ्रष्टाचार में किसका किसका हाथ है पता चल सके ।

अधिकारियों की मिलीभगत की जांच हो’

NCP नेता ने मांग कि है कि प्रशासनिक स्तर पर मिलीभगत के बिना इतने बड़े स्तर पर नियमों की अनदेखी संभव नहीं है उन्होंने ठाणे महानगर पालिका आयुक्त और जिला कलेक्टर से इस मामले में कार्रवाई की मांग किए जाने की जानकारी दी प्रधान ने दावा किया कि नासिक में भी इसी तरह के एक मामले में जांच के बाद बिल्डरों , आर्किटेक्ट और संबंधित सरकारी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की गई थी , इसी आधार पर उन्होंने ठाणे के मामले की भी उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।

कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन की चेतावनी

मनोज प्रधान ने प्रशासन को चेतावनी दी कि यदि भूमि एकर्स और मामले से जुड़े लोगों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई नहीं की गई तो ‘डेढ़ दिन’ के गणपति विसर्जन के बाद आंदोलन शुरू किया जाएगा , उन्होंने कहा कि मामला केवल एक बिल्डर या एक प्रोजेक्ट तक सीमित नहीं है बल्कि यह सवाल गरीब और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लिए निर्धारित आवासीय अधिकारों का है , प्रशासन को दस्तावेजों की जांच कर वास्तविक स्थिति जनता के सामने लानी चाहिए इस पत्रकार परिषद में पार्टी नेता अभिजीत पवार, प्रकाश पाटिल, राजेश कदम (युवा विंग कार्यकारी अध्यक्ष) और सचिन पंधारे मौजूद रहे ।

610 किफायती घरों को लेकर भी भूमि एकर्स पर आरोप

भूमि एकर्स पर इससे पहले भी 610 किफायती आवासीय इकाइयों से जुड़े मामले में गंभीर आरोप लगाए जाने का दावा किया गया है मनोज प्रधान के अनुसार ये आवासीय इकाइयां EWS (आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग) के लिए निर्धारित थीं और ULC योजना के तहत सरकारी आदेश के अनुसार इन्हें ₹911 प्रति वर्ग फुट की दर से उपलब्ध कराया जाना था आरोप है कि इन घरों को निर्धारित दर के बजाय बाजार भाव पर बेच दिया गया ।

प्रधान ने बताया कि इस मामले में ठाणे अर्बन एग्लोमरेशन के अतिरिक्त कलेक्टर की ओर से नोटिस भी जारी किया गया था लेकिन उनके अनुसार अभी तक अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई है , इसी को लेकर मनोज प्रधान ने सवाल उठाया कि “क्या बार-बार गंभीर आरोपों में घिरे इस बिल्डर को प्रशासन की ओर से कोई विशेष संरक्षण प्राप्त है?”

उन्होंने सरकार और प्रशासन से मांग की है कि दोनों मामलों की निष्पक्ष जांच कर दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए नहीं तो NCP सड़कों पर उतर कर न्याय के लिए आंदोलन करेगी , अब देखना यह दिलचस्प होगा कि क्या NCP नेता के इस मांग पर कोई जांच होती है या फिर नहीं ।

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