ठाणे (चंद्रभूषण विश्वकर्मा) : ठाणे के वागले एस्टेट स्थित सावरकर नगर क्षेत्र के ज्ञानोदय विद्या मंदिर को लेकर कथित प्रशासनिक अनियमितताओं और शिक्षकों के साथ भेदभाव के आरोप सामने आने के बाद शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो गए हैं ? शिक्षणाधिकारी देवीदास महाजन पर शिकायत कर्ता ने आरोप लगाया है कि कई बार शिकायत करने के बाद भी शिक्षणाधिकारी ज्ञानोदय विद्यामंदिर के मुख्याध्यापक प्रेम तिवारी का वेतन रोकने का पत्र जारी किए लेकिन शिक्षा विभाग की मिली जुली भ्रस्टाचार की वजह से अभी तक ज्ञानोदय विद्या मंदिर के मुख्याध्यापक प्रेम तिवारी का वेतन अभी तक नहीं रोका गया है , लोगो का कहना है कि विद्यालय से जुड़ी शिकायतों और कथित अनियमितताओं के बावजूद संबंधित स्तर पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं होने से विद्यालय प्रशासन को खुली छूट मिल रही है इस पूरे मामले में शिक्षणाधिकारी देवीदास महाजन की भूमिका को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं ।
मुख्याध्यापक पर शिक्षकों के साथ कथित भेदभाव का आरोप …….
विद्यालय के मुख्याध्यापक प्रेम तिवारी पर कुछ शिक्षकों ने कथित तौर पर भेदभावपूर्ण रवैया अपनाने का आरोप लगाया है नाम सार्वजनिक नहीं करने की शर्त पर कुछ शिक्षकों ने दावा किया कि एरियस से संबंधित फाइलों के निपटारे में समान प्रक्रिया का पालन नहीं किया जाता
शिक्षकों का आरोप है कि कुछ चुनिंदा शिक्षकों की एरियस फाइलें समय पर आगे बढ़ाई जाती हैं, जबकि अन्य शिक्षकों की फाइलों को कथित तौर पर लंबे समय तक लंबित रखा जाता है इतना ही नहीं, आरोप लगाने वाले शिक्षकों का दावा है कि जिन लोगों की फाइलें आगे बढ़ती हैं उनमें विद्यालय प्रशासन से नजदीकी रखने वाले लोगों को प्राथमिकता मिलने की बात सामने आती है हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है ऐसे में शिक्षा विभाग द्वारा पूरे मामले की निष्पक्ष जांच किए जाने की मांग जोर पकड़ रही है ।
वेतन रोकने के आदेशों पर भी सवाल ………
गौरतलब है कि मामले का दूसरा गंभीर पहलू विद्यालय के मुख्याध्यापक से संबंधित वेतन कार्रवाई को लेकर बताया जा रहा है सूत्रों के हवाले से दावा किया जा रहा है कि प्रेम तिवारी के वेतन को रोकने से संबंधित पत्र कई बार जारी होने के बावजूद ठाणे पे यूनिट स्तर पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई , यदि यह दावा सही है तो सवाल यह उठता है कि संबंधित आदेशों के बावजूद कार्रवाई क्यों नहीं हुई ? क्या संबंधित विभागीय अधिकारियों तक आदेश पहुंचने के बाद भी उसे लागू नहीं किया गया ? और यदि कार्रवाई नहीं हुई तो इसके लिए जिम्मेदारी किसकी तय होगी ?
शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर उठ रहे सवाल …………

ज्ञात हो कि पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल शिक्षा विभाग की निगरानी व्यवस्था को लेकर है यदि किसी विद्यालय के प्रशासन , शिक्षकों की एरियस फाइलों और वेतन संबंधी मामलों को लेकर लगातार शिकायतें सामने आ रही हैं तो विभाग को दस्तावेजों की जांच कर वास्तविक स्थिति सामने लानी चाहिए , शिक्षणाधिकारी देवीदास महाजन से भी यह स्पष्ट किए जाने की मांग उठ रही है कि ज्ञानोदय विद्या मंदिर से संबंधित शिकायतों पर अब तक क्या कार्रवाई की गई ? क्या विद्यालय की एरियस फाइलों की जांच हुई ? क्या वेतन रोकने संबंधी किसी आदेश की विभागीय स्तर पर समीक्षा की गई ? और यदि कोई अनियमितता सामने आती है तो संबंधित जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ क्या कार्रवाई होगी ?
निष्पक्ष जांच से ही सामने आएगा सच ………….
बता दे कि ज्ञानोदय विद्या मंदिर से जुड़े आरोप गंभीर प्रकृति के हैं इसलिए केवल आरोप – प्रत्यारोप के आधार पर निष्कर्ष निकालने के बजाय शिक्षा विभाग द्वारा दस्तावेजों , एरियस फाइलों , वेतन संबंधी आदेशों और विभागीय पत्राचार की स्वतंत्र जांच कराई जानी चाहिए , इस मामले में मुख्याध्यापक प्रेम तिवारी और शिक्षणाधिकारी देवीदास महाजन का पक्ष सामने आना भी जरूरी है यदि लगाए गए आरोप निराधार हैं तो संबंधित पक्ष को दस्तावेजों के साथ अपनी स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए वहीं यदि किसी प्रकार की अनियमितता सामने आती है तो जिम्मेदार लोगों पर नियमानुसार कार्रवाई होनी चाहिए , ज्ञानोदय विद्या मंदिर से जुड़े कथित मामलों की निष्पक्ष जांच कब होगी और शिक्षकों द्वारा लगाए जा रहे आरोपों का सच कब सामने आएगा ? या फिर शिक्षा विभाग की मिलीभगत से इस मामले को भी दबा दिया जायेगा ?