ठाणे ( चंद्रभूषण विश्वकर्मा ) । ठाणे रेलवे स्टेशन के ब्रिज और प्लेटफॉर्म पर कथित तौर पर चल रहे अवैध कारोबार को लेकर रेलवे प्रशासन की कार्रवाई पर सवाल उठ रहे हैं आरोप है कि रेलवे परिसर में परफ्यूम, बैग, कपड़े और ब्लूटूथ जैसे सामान की अनधिकृत बिक्री की शिकायतें बार – बार किए जाने के बावजूद समस्या पूरी तरह खत्म नहीं हो रही , शिकायतकर्ताओं का दावा है कि कार्रवाई के कुछ घंटों बाद ही संबंधित गतिविधियां दोबारा शुरू हो जाती हैं।
इस स्थिति ने रेलवे प्रशासन की निगरानी व्यवस्था और कार्रवाई की प्रभाव पर सवाल खड़े कर दिए हैं ।
अब यह मांग उठ रही है कि रेलवे स्टेशन के ब्रिज और प्लेटफॉर्म पर चल रही कथित अनधिकृत बिक्री की निष्पक्ष जांच कर इस अवैध धंधे में लिप्त अधिकारियों पर भी कार्रवाई हो ताकि इस अवैध धंधों के साथ साथ इन धंधों को सह देने वाले अधिकारी और कर्मचारी पर कार्यवाही हो सके और इन धंधों पर पुर्णतः विराम लग सके ।
X पर शिकायतो के बाद भी कथित कारोबार दोबारा हो रहा शुरू ..आशीर्वाद किसका …?

सूत्रों की माने तो ठाणे रेलवे स्टेशन परिसर में कथित अवैध गतिविधियों को लेकर रेलवे प्रशासन से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कई बार शिकायतें की गई हैं आरोप है कि शिकायत मिलने के बाद कुछ समय के लिए कार्रवाई दिखाई देती है लेकिन उसके बाद स्थिति फिर पहले जैसी हो जाती है क्योंकि इसमें रेलवे प्रशासन का भी आशीर्वाद है इसलिए शिकायतों के बावजूद एक ही स्थान पर बार – बार अनधिकृत बिक्री शुरू हो रही है तो यह रेलवे की निगरानी और कार्रवाई की निरंतरता पर गंभीर सवाल खड़े करता है ।
आखिर कार्रवाई के बाद भी इन गतिविधियों पर स्थायी रोक क्यों नहीं लग पा रही है ?
क्या नियमित निरीक्षण किया जा रहा है ?
और क्या कार्रवाई के बाद संबंधित स्थानों की दोबारा जांच होती है ?
इन सवालों का जवाब रेलवे प्रशासन को देना चाहिए लेकिन इस पर ठाणे रेलवे प्रशासन चुप्पी साधी हुई है ।
रेलवे पुलिस के वरिष्ठ निरीक्षक की भूमिका पर सवाल….?
ज्ञात हो कि इस मामले में ठाणे रेलवे पुलिस के वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक की भूमिका को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं , कुछ लोगों के बीच यह चर्चा होने का दावा किया जा रहा है कि कथित अनधिकृत कारोबार को रोकने के लिए पर्याप्त और प्रभावी कार्रवाई इसलिए नहीं हो रही है क्योंकि इस इन सभी अवैध धंधों पर ठाणे RPF और GRP के वरिष्ठ अधिकारियों का आशीर्वाद है … हालांकि संबंधित पुलिस अधिकारी या रेलवे प्रशासन की ओर से संरक्षण दिए जाने का कोई प्रमाण उपलब्ध नहीं कराया गया है लेकिन इस मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कार्यवाही की माँग की जा रही है ।
क्या रोजाना वसूली के दावे जांच से ही सामने आएगी सच्चाई…..?
बता दे कि इस मामले में नाम सार्वजनिक नहीं करने की शर्त पर एक व्यक्ति के हवाले से कथित वसूली के दावे भी सामने आए हैं उपलब्ध जानकारी के अनुसार, परफ्यूम की बिक्री से प्रतिदिन करीब 1,000 से 1,500 रुपये और बैग, कपड़े तथा ब्लूटूथ जैसे सामान की बिक्री से प्रतिदिन करीब 400 से 500 रुपये वसूले जाने का आरोप लगाया गया है , दावा यह भी किया गया है कि इस कथित रकम को अलग – अलग लोगों के बीच बांटा जाता है हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है , ऐसे में क्या इन आरोपों की निष्कपक्ष जांच कर दूध का दूध और पानी का पानी किया जाता है या फिर तातुर मातूर का जांच कर मामले को दबाने की कोशिश की जाती है ?
रेलवे परिसर में अनधिकृत बिक्री पर रोक क्यों नहीं ..?
रेलवे परिसर में सामान बेचने के लिए संबंधित नियमों और अनुमति का पालन जरूरी है यदि कोई व्यक्ति बिना आवश्यक अनुमति के ब्रिज या प्लेटफॉर्म पर सामान बेच रहा है तो रेलवे प्रशासन को नियमानुसार कार्रवाई कर उन सभी पर FIR दर्ज करनी चाहिए लेकिन यहां तो शिकायत करने के बाद तातुर मातूर की कार्यवाही की जाती है और कुछ घंटे बाद फिर से अवैध धंधों का जखीरा लगा दिया जाता है ।
रेलवे प्रशासन से उठ रहे सीधे सवाल…?
ठाणे रेलवे स्टेशन पर कथित अनधिकृत बिक्री को लेकर अब कई सवालों के जवाब मांगे जा रहे हैं …….
– X पर मिली शिकायतों पर कितनी बार और क्या कार्रवाई की गई ?
– कार्रवाई के कुछ घंटों बाद कथित कारोबार दोबारा शुरू होने की शिकायतों की जांच हुई या नहीं ?
– ब्रिज और प्लेटफॉर्म पर सामान बेचने वालों के पास आवश्यक अनुमति है या नहीं ?
– कथित वसूली के आरोपों की जांच किस स्तर पर की जाएगी ?
– क्या वरिष्ठ अधिकारी नियमित निरीक्षण और कार्रवाई की समीक्षा कर रहे हैं ?
अब देखना यह दिलचस्प होगा कि रेलवे प्रशासन इन शिकायतों को कितनी गंभीरता से लेता है और ठाणे स्टेशन पर कथित अनधिकृत कारोबार को रोकने के लिए क्या ठोस कदम उठाता है और क्या संबंधित रेलवे पुलिस अधिकारी और प्रशासन का आधिकारिक पक्ष सामने आता है या नहीं ?
JJVNEWS का सवाल क्या ठाणे रेलवे अधिकारी देंगे जबाब ? : शिकायतों के बाद कार्रवाई होती है, लेकिन यदि कथित कारोबार फिर शुरू हो जाता है, तो इसकी जिम्मेदारी किसकी है? रेलवे प्रशासन को इस मामले में पारदर्शी जवाब देना चाहिए या नहीं ?