मुंबई । काशीगांव पुलिस ने लोगों को यह विश्वास दिलाकर कथित रूप से ठगी करने के आरोप में तीन लोगों को गिरफ्तार किया है कि साधारण ज़ेरॉक्स पेपर और केमिकल की मदद से भारतीय करेंसी नोट तैयार किए जा सकते हैं , पुलिस के मुताबिक गिरफ्तार आरोपियों की पहचान अमोल बांदगर, चक्राली चक्रवर्ती और निशा मोरे के रूप में हुई है ,आरोपी महाराष्ट्र के सांगली और रायगढ़ जिले के रहने वाले बताए गए हैं पुलिस की माने तो डिटेक्शन टीम को मिली जानकारी के आधार पर वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के निर्देश और वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक राहुल पाटील के मार्गदर्शन में काशीगांव पुलिस स्टेशन की टीम ने यह कार्रवाई की गई ।
ऐसे किया जाता था कथित ‘नोट बनाने’ का प्रदर्शन…
गौरतलब है कि आरोपी सफेद कागज को ₹500 के नोट के आकार में काटते थे और उसे काले रंग के केमिकल में डुबोते थे इसी दौरान एक असली करेंसी नोट जिस पर पहले से काला लेप लगाया गया होता था कथित तौर पर उसी केमिकल वाले कंटेनर में रखा जाता था , बताया गया है कि प्रदर्शन के दौरान आरोपी इस तरह से काले किए गए असली नोट को बाहर निकालते थे कि सामने वाले व्यक्ति को यह भ्रम हो जाए कि सफेद कागज से ही करेंसी नोट तैयार हुआ है , इसके बाद कथित तौर पर दूसरे कंटेनर में मौजूद पाउडर और पानी की मदद से नोट पर लगी काली परत हटाने की प्रक्रिया दिखाई जाती थी ।
पुलिस के अनुसार इसी प्रक्रिया को करेंसी ‘प्रिंट’ या तैयार करने की तकनीक बताकर संभावित पीड़ितों का विश्वास जीतने की कोशिश की जाती थी ।
₹1 लाख लगाओ, ₹3 लाख पाओ का कथित लालच
पुलिस के अनुसार आरोपी संभावित पीड़ितों को यह कथित लालच देते थे कि उनके पास पैसा तीन गुना करने की तकनीक है कथित तौर पर ₹1 लाख निवेश करने पर ₹3 लाख वापस देने का भरोसा दिया जाता था , पुलिस को संदेह है कि केमिकल और करेंसी का यह प्रदर्शन लोगों का विश्वास हासिल करने के लिए किया जाता था जिसके बाद उनसे रकम ली जाती थी पुलिस ने कार्रवाई के दौरान ₹1 लाख नकद , केमिकल तथा कथित रूप से इस प्रक्रिया में इस्तेमाल होने वाली अन्य सामग्री बरामद किए जाने की जानकारी दी है।
अन्य मामलों और साथियों की तलाश…
मामले की आगे जांच जारी है पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि गिरफ्तार आरोपी इससे पहले भी इसी तरह की किसी ठगी में शामिल रहे हैं या नहीं , साथ ही पुलिस यह भी जांच कर रही है कि इस कथित गिरोह से अन्य कोई व्यक्ति जुड़ा हुआ है या नहीं , पुलिस की जांच पूरी होने के बाद ही इस मामले में ठगी के पूरे नेटवर्क और आरोपियों की भूमिका को लेकर स्थिति स्पष्ट हो सकेगी ।