पुणे | संतोष पंडित को महाराष्ट्र के कैबिनेट मंत्री चंद्रकांत पाटिल और पुणे महानगरपालिका की एक पूर्व महिला कॉर्पोरेटर के खिलाफ सोशल मीडिया पर कथित तौर पर आपत्तिजनक अश्लील और मानहानिकारक वीडियो पोस्ट करने के आरोप में कोथरुड पुलिस ने गिरफ्तार किया गया था लेकिन अब अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश एस. यू. वडगावकर ने संतोष पंडित को ₹25,000 के निजी मुचलके और इतनी ही राशि के जमानतदार पर रिहा करने का आदेश दिए है गौरतलब है कि इस मामले से जुड़े डिजिटल सबूत पहले से ही पुलिस के पास हैं और जांच के लिए आरोपी को आगे हिरासत में रखने की आवश्यकता नहीं है ।
बता दे कि कोर्ट ने पंडित पर सख्त शर्तें लागू की हैं और वे शिकायतकर्ता से प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से संपर्क नहीं कर सकते और न ही मामले के किसी सबूत के साथ छेड़छाड़ करने की कोशिश करेंगे , न्यायालय ने यह भी साफ किया कि जमानत मिलने का मतलब यह नहीं है कि आरोपी आरोपों से बरी हो गया है मामले की आगे की कानूनी कार्यवाही जारी रहेगी लेकिन अब लोगो में यह चर्चा शुरू हो गया है कि क्या अब सरकार और सत्ता पर सवाल किया जायेगा तो सत्ते में बैठे लोग इस तरह से लोगो को जूठे केस में फ़सा कर लोगो का आवाज दबाने की पूरी कोशिश कर रहे है क्या अब ग्राउंड पर सच्चाई दिखाना गलत है क्या इस पर भी कोर्ट में बैठे जज कोई टिप्पड़ी करेंगे ?